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Monday, September 25, 2017

मित्र मंडली - 36






मित्रों ,
"मित्र मंडली" का छत्तीसवाँ अंक का पोस्ट प्रस्तुत है। इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है।  इसमें  दिनांक 18.09.2017  से 24.09.2017  तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।

पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है  :-
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मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों  तक पहुँचाना है। 

आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी  के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा।  

प्रार्थी 

राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

मित्र मंडली -36  

इस सप्ताह के नौ-रत्न रचनाकार 


सुनी गिलहरी --------- कविता ----- 

रेणु  बाला जी  


कास के फूल

श्वेता सिन्हा जी  

"  प्रकृति के अनमोल खजाने को देख हम मन्त्र-मुग्ध  होते रहते है जिसका नाम और उसकी उपस्थिति का महत्व हमें पता नहीं होता ऐसा ही एक फूल - "कास के फूल " के बारे में विस्तृत जानकारी एवं प्रकृति प्रेम को उजागर करती सुन्दर कविता।  श्वेता सिन्हा जी के शब्द - कास के फूल खिलने का मतलब बरसा ऋतु की विदाई और शरद का आगमन।मौसम अंगड़ाई लेने लगता है।हवा की गरमाहट नरम होने लगती है,मौसम सुहावना होने लगता है।।" 

कहानी है मेरी पड़ोसन की

सुधा सिंह जी  

आज जो जोगन गीत वो गाऊं.

विश्व मोहन जी

मिथक कथा जो आज प्रासंगिक है....पाँच आश्चर्य....

दिग्विजय अग्रवाल जी 

आँखें

रवींद्र सिंह यादव जी 


खिलते हैं फूल पाँव के ठोकर से

राजीव कुमार झा  जी 



जहाँ तुम थे

जयंती प्रसाद शर्मा  जी


आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 02-10-2017  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....


मेरी दो प्रस्तुति  : 

1.  जय अपराधी बाबा की




Friday, September 22, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 25 (Photography : Bird 25 )

Photography: (dated 28 05 2017 06: 45 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Common nightingale


The common nightingale or simply nightingale , also known as rufous nightingale, is a small passerine bird best known for its powerful and beautiful song. It was formerly classed as a member of the thrush family Turdidae, but is now more generally considered to be an Old World flycatcherMuscicapidae. It belongs to a group of more terrestrial species, often called chats.
Scientific name:  Luscinia megarhynchos
Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

बुलबुल (कलविंकक) एक छोटा पक्षी है जो अपने मधुर आवाज़ के लिए जाना जाता है। यह लाल दुम वाले बुलबुल से अलग है। 
वैज्ञानिक नाम: ल्यूसिनिया मीगर्दींचोस
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव
अन्य भाषा में नाम:-
Bengali: পাপিয়া;  Gujarati: બુલબુલ; Hindi बुलबुल, कलविंकक; Kannada: ನೈಟಿಂಗೇಲ್; 
Malayalam: രാപ്പാടി; Marathi नाइटिंगेल; Nepali: बुलबुल



©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"








Wednesday, September 20, 2017

जय अपराधी बाबा की

 जय अपराधी बाबा की 

सर्वप्रथम जेल में सज़ा काट रहे सभी बाबाओं को साष्टांग प्रणाम अर्थात  सिर, हाथ, पैर, हृदय, आँख, जाँघ, वचन और मन इन आठों से युक्त होकर भूमि पर सीधे लेटकर मेरा प्रणाम। एक ही बात को बार-बार लिखने या कहने की विधा मैंने इन्हीं बाबाओं से सीखी है और यहाँ तो मजबूरी है कि एक तो बाबाओं की शैक्षणिक योग्यता कम है या हिंदी की कुछ शब्दों के भाव को नहीं जानते है। साष्टांग प्रणाम इन बाबाओं के भक्तों को भी, जो इन बाबाओं के विरुद्ध साक्ष्य होने के बाद भी अपनी भक्ति में कोई कमी नहीं रखी। इसके साथ ही मैं वैधानिक ढंग से क्षमा चाहता हूँ उन बाहुबली भक्तों से जो महाबली बन कर भारत के सम्प्रभुता को चुनौती देते आए है तो मैं किस खेत की मूली हूँ। 

वस्तुतः  इस हास्य-व्यंग का मूल उद्देश्य बाबाओं को महिमामंडित करने का है फिर भी अगर किसी को लगे कि मैंने इन महापुरुषों के प्रति गुस्ताख़ी की हो तो उन पाठकों से विनम्र निवेदन है कि इस आलेख को पुनः पढ़ कर अपनी प्रतिक्रिया बदलें या अपनी प्रतिक्रिया फिर भी ना बदल पाएं तो मेरे इस विशेष अनुरोध पर किसी नास्तिक से इस लेख के बारे में राय लें। 

इन बाबाओं के चरणों में अपना श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए मैं यह कहना चाहता हूँ कि आपलोग यूथ आइकॉन है. आपकी महिमा का डंका सम्पूर्ण सोशल मीडिया में बजता है। इस चराचर जगत में सबसे ज्यादा पैसा, शोहरत, आनंद और  रुतबा है तो इस बाबागिरी में है। अब वह दिन दूर नहीं जब कॉर्पोरेट जगत या आईआईटियन सुनियोजित ढंग से आपके ही रास्तों पर चल कर अतुल्य भारत का निर्माण कार्य में सहयोग देंगे। ऐसे भी आपका जीवन अनुकरणीय है क्योंकि आप हिन्दू शास्त्रों के अनुरूप जीवन व्यतीत करते है पहले आप किसी ना किसी गुरुकुल में रहते है। ज्ञान अर्जन के उपरांत आप गृहस्थ आश्रम वरण करते हुए अपने एवं अपने वंशजो के लिए अकूत सम्पति अर्जित करते है फिर अंगुलिमाल डाकू की तरह कुख्यात हो जाते है तो कोई जज रुपी बुद्ध आपको आध्यात्मिक राह दिखाते है और तब आप सभी सांसारिक मोह-माया को त्याग कर वानप्रस्थ आश्रम को वरण करते है और स्वं को जानने हेतु तपस्या करने के लिए जेल की सेवा लेते हैं। अंत में 20 से 25 वर्ष का वानप्रस्थ काल को भोग कर संन्यास आश्रम को वरण करेंगे इसी मनोकामना के साथ इस आलेख के समापन के पूर्व मैं कहना चाहता हूँ कि "हे भक्तों, बाबा अपने क्रम-संन्यास का भोग कर रहें है और मोक्ष की ओर अग्रसर है। अतः यह शोक की घडी नहीं है। इस स्वर्णिम अवसर को लपको और तुम भी बाबा बन जाओ। तुम्हें तो पता ही होगा कि इस सत्संग परिपाटी में एक बाबा के जाने के बाद अनेकों बाबाओं की उत्पत्ति होती है। इसलिए तुम सभी चिंताओं से मुक्त होकर बाबा बनने की प्रक्रिया में शामिल हो जाओ और परम पद को प्राप्त करो। भक्त ही तुम्हारा कल्याण करेंगे। जय अपराधी बाबा की। इति।।

-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"







Monday, September 18, 2017

मित्र मंडली - 35






मित्रों ,
"मित्र मंडली" का पैंतीसवें अंक का पोस्ट प्रस्तुत है। इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है।  इसमें  दिनांक 11.09.2017  से 17.09.2017  तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।

पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है  :-
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मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों  तक पहुँचाना है। 

आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी  के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा।  

प्रार्थी 

राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

इस सप्ताह के सात रचनाकार 


राह तुम्हारी तकते - तकते----------------कविता -- 

रेणु  बाला जी  

अबूझे प्रश्न

मीना शर्मा जी 

साथ तुम्हारे हूँ

श्वेता सिन्हा जी  

मुद्राएँ ......

डॉ. प्रतिभा सोवती जी  


दर्द को आशियां मिला

कैलाश शर्मा जी 



क़ीमती

अमित अग्रवाल  जी


आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 25  -09-2017  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....


मेरी दो प्रस्तुति  : 

1.  SHE




2. फोटोग्राफी : पक्षी 24 (Photography : Bird 24 )


Friday, September 15, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 24 (Photography : Bird 24 )

Photography: (dated 14 06 2017 06: 00 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Crested or Changeable hawk-eagle 


The crested hawk-eagle or changeable hawk-eagle  is a bird of prey species of the family Accipitridae. Changeable hawk-eagles breed in the Indian subcontinent, mainly in India and Sri Lanka, and from the southeast rim of the Himalaya across Southeast Asia to Indonesia and the Philippines. This is a bird occurring singly (outside mating season) in open woodland, although island forms prefer a higher tree density. It builds a stick nest in a tree and lays a single egg. 
Scientific name:  Nisaetus cirrhatus
Photographer :   Rakesh kumar srivastava

क्रेस्टेड बाज़-ईगल या चेंजेबल बाज़-ईगल, एसिप्रिट्रिडे (शिकार प्रजाति) परिवार  की  का एक पक्षी है।
भारतीय उपमहाद्वीप में मुख्य रूप से भारत और श्रीलंका में, और दक्षिण पूर्व एशिया से इंडोनेशिया और फिलीपींस के दक्षिण-पूर्व हिमालय के  किनारे  ये  नस्ल पाए जाते हैं। यह खुली जंगलों में अकेले उड़ने वाला पक्षी है। यह एक पेड़ में एक छड़ी के आकर वाले घोंसले बनाता है और एक अंडा देता है।
वैज्ञानिक नाम: निसातिस सिर्रहातुस
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव

अन्य भाषा में नाम:-
Gujarati: મોર બાજ; Hindi: शाह बाज़; Malayalam: കിന്നരിപ്പരുന്ത്; Marathi: तुरेबाज व्याध, झेंडोरी गरुड (कोकण भाग); Nepali: शदलचील






©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"








Wednesday, September 13, 2017

SHE

 
          
               SHE

With broken pieces of what once were dreams.
Her soul was on fire and made terrible screams..
Her eyes were closed, her tears very fiery streams...

She's done, She's gone, She's no more.
Her boat has sailed Long ago from the seashore..
Now she's in a place new, with a white marble door...

She forgave everyone because her heart was pure.
But beware wrongdoers, for karma is for sure..
Once it takes hold of you, there's no cure...

©  Krishna Srivastava








Monday, September 11, 2017

मित्र मंडली - 34





मित्रों ,
"मित्र मंडली" का चौतीसवें अंक का पोस्ट प्रस्तुत है। इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है।  इसमें  दिनांक 04.09.2017  से 10.09.2017  तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।

पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है  :-
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मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों  तक पहुँचाना है। 

आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी  के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा।  

प्रार्थी 

राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

इस सप्ताह के सात रचनाकार 

मित्र मंडली - 34

बातें-कुछ दिल की, कुछ जग की 

कैलाश शर्मा जी 


" हम हिन्दी भाषी के सोच में ही हिंदी के प्रति दुराव का भाव रखते है तो दूसरों से उम्मीद करना बेमानी है। जब-तक हम हिंदी को दिल से नहीं अपनाएंगे तब तक सरकारी प्रयास व्यर्थ है। इसको हम आंचलिक भाषा के दर्द के साथ समझ सकते कि भोजपुरी भाषी अन्य प्रादेशिक भाषी की तरह सामूहिक स्थल पर आपस में भोजपुरी भाषा में बात करना नहीं चाहते, परन्तु यह लेख आशा जगाती है कि हिंदी की बानगी बढ़ रही है,  गति धीमी ही सही कारवां का दायरा बढ़ रहा है। " । 

'पूरा सच'

विश्व मोहन जी

आभार गौरी लंकेश जानवरों के लिये मरने के लिये

सुशील कुमार जोशी  जी 

""उलूक समझता नहीं है और अपनी संवेदना व्यक्त कर देता है, क्यूँ नहीं समझता तेरे लिखने से कोई आहत नहीं होता और जिसके लिखने से कोई आहत होता है तो उसको मौत मिलती है।

मधु भरे थे

श्वेता सिन्हा जी  

"वक्त जब रेत  की तरह मुठ्ठी से फिसल जाती है और अच्छे कर्म की छोड़  केवल आपने लाभ  के लोभ में कर्म करते है तो अंत समय में पछतावा के सिवा कुछ हाथ नहीं लगता। सुन्दर  जीवन जीने की सीख  देती कविता ।" 

आओ बुढ़ापा जिएं......

सुधा देवरानी जी 

यह जिंदगी

उपासना स्याग जी 


आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 18 -09-2017  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....


मेरी दो कृति : 

1.  तेरे बिन




2. फोटोग्राफी : पक्षी 23 (Photography : Bird 23 )