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Friday, September 23, 2011

तपिश



 
  (पृष्ठभूमि :- नायक अपनी नायिका को ग्रीष्म ऋतु में याद कर रहा  है और विरह  की  आग  में  जल  रहा   है |  )

तपिश

तपिश दे रहा है , सूरज अभी भी ,
तू आ जाए तो , चैन आ जाए |
तेरी राह में मैं हूँ , पलकें बिछाएँ ,
मगर तू न आए , जिया भी न जाए |
कैसे जिउ अब , तेरे बगैर मैं ,
चाँद आ जाए तो , चैन आ जाए |
शान -ए -फलक पे , तू मुस्कुराए ,
तू आ जाए तो , चैन आ जाए |
जिए जा रहा हूँ , पर तू तो न  आए ,
चाँद आ जाए तो , चैन आ जाए |
डूबने की चाहत है , तेरी चांदनी में ,
तू आ जाए तो , चैन आ जाए |

-राकेश कुमार श्रीवास्तव
(०२/०५/२००७)




  
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