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Monday, February 20, 2017

मित्र मंडली - 7



मित्रों ,

"मित्र मंडली" की सातवीं कड़ी का पोस्ट प्रस्तुत है। इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग फॉलोवर/अनुसरणकर्ता के हिंदी पोस्ट के लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्ट का चयन साप्ताहिक आधार पर है।  इसमें  दिनांक 13.02.2017  से 19.02.2017  के हिंदी पोस्ट का संकलन है।

इसका उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों  तक पहुँचाना है। 

आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर टिपण्णी के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। यकीं करें ! आपके द्वारा दिया गया विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा।  

प्रार्थी 

राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

                                  मित्र मंडली - 7 



1. जलसेना विद्रोह (मुम्बई) - १८-२३ फ़रवरी सन् १९४६




2. दर्पण





3. "जब तक मैंने समझा,जीवन क्या है?जीवन बीत गया" !- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-समीक्षक)



4. मधुबाला की ८४ वीं जयंती





आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव आपेक्षित है। अगला अंक 27-02-2017  को प्रकाशित होगी। धन्यवाद ! अंत में ....

मेरी दो कविताएँ 


5. प्रेम-गीत



http://rakeshkirachanay.blogspot.in/2017/02/blog-post_14.html



6. कलम की आवाज़


http://rakeshkirachanay.blogspot.in/2017/02/blog-post_17.html

Friday, February 17, 2017

कलम की आवाज़










कलम की आवाज़ 

नहीं तुम बनना साहित्यकार,
नहीं तुम बनना रचनाकार,
रोजी-रोटी ये नहीं देगी 
ना कोई सपना होगा साकार,
नहीं तुम बनना साहित्यकार ......

पेशा कोई भी चल जाएगा,
तुम को सब कुछ मिल जाएगा,
सुख-समृद्धि तेरे घर में होगा 
होगा नौकर बंगला मोटर कार 
नहीं तुम बनना साहित्यकार ......

ब्लैक-मनी, रिश्वतखोरी का अलग से अलख जगाना,
भोग-विलास के सभी साधन तुमको घर में है लाना,
कोई भूख से मर जाए या कोई किसी की अस्मत लूटे  
तुम को इससे क्या लेना इसके लिए है साहित्यकार,
नहीं तुम बनना साहित्यकार ......

गर तुम फिर भी नहीं माने,
तो सुन लो फिर क्या होगा,
महफ़िल में वाह-वाही होगी
पर घर इससे नहीं चलेगा .

दुनियाँ की सारी समस्या पर 
कागज़ काला करते ही रहना 
भैंस के आगे बीन बजाकर
अपना सिर ही धुनते रहना 
फिर भी हौसला है तुम में 
तो ही बनना साहित्यकार.

समाज को दिखाते रहो तुम ही आईना
गरीब और मजलूम की आवाज़ उठाना 
तुम्हारी कलम ही है अब इनकी आस 
कहीं खो ना जाए इनकी मौन चीत्कार   
तुम जरूर बनना साहित्यकार......

समाजवाद का परचम लहरेगा,
ना कोई भूखा मरेगा, 
ना किसी की अस्मत ही लुटेगी,
जियेंगे फिर सभी शान से 
सबका सपना होगा साकार,
तुम जरूर बनना साहित्यकार......

तेरी कलम से इक दिन भैया 
इंक़लाब का सूरज भी निकलेगा,
बेईमानों और रिश्वतखोरों को 
उनके करतूतों की सज़ा मिलेगी.
तुम जरूर बनना साहित्यकार......

- © राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Tuesday, February 14, 2017

प्रेम-गीत









प्रेम-गीत 

जी ना सकूँगा तुम बिन मैं यारा,
गर तुने मुझको प्यार से पुकारा,
मैं तुमसे प्यार करूँगा,
ना इंकार करूँगा,
हो जाऊँगा मैं तुम्हारा ,
सुन ले तू ये मेरे यारा .

हम साथ चलें जैसे नदी और किनारा,
नहीं साथ छूटे कभी हमारा-तुम्हारा,
तुम बिन अब जी ना सकूंगा,
मैं तुमसे प्यार करूँगा,
हो जाऊँगा मैं तुम्हारा ,
सुन ले तू ये मेरे यारा .

जब तक है आसमां में चाँद और सितारा,
रौशन रहेगा तब तक प्यार हमारा,
मैं तुझे नाज़ से रखूंगा,
मैं तुमसे प्यार करूँगा,
हो जाऊँगा मैं तुम्हारा ,
सुन ले तू ये मेरे यारा .

मजे में चलेगी मेरे जीवन की धारा,
जबसे मिलेगा मुझे साथ तुम्हारा,
दिल में तुझे छुपा लूँगा,
मैं तुमसे प्यार करूँगा,
हो जाऊँगा मैं तुम्हारा ,
सुन ले तू ये मेरे यारा .

लो आ गई, तेरी बाहों में यारा,
नहीं छोड़ना कभी दामन हमारा,
मैं तुमसे प्यार करूँगी,
ना इंकार करूँगी,
हो जाऊँगी मैं तुम्हारी ,
सुन ले तू ये मेरे यारा .

- © राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Monday, February 13, 2017

मित्र मंडली - 6



मित्रों ,
इस पोस्ट में शामिल रचनाओं के  चुनाव का दो आधार हैं :- 
1.  रचनाकार मित्रों का मेरे ब्लॉग का अनुसरणकर्ता/फॉलोवर होना अनिवार्य है।
2. पोस्ट का कंटेंट अश्लील या किसी भी व्यक्ति की भावनाओं पर चोट न पहुंचाती हो। 

"मित्र मंडली" की छठी  कड़ी का पोस्ट प्रस्तुत है। इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग फॉलोवर/अनुसरणकर्ता के हिंदी पोस्ट के लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्ट का चयन साप्ताहिक आधार पर है।  इसमें  दिनांक 06.02.2017  से 12.02.2017  के हिंदी पोस्ट का संकलन है।

इसका उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों  तक पहुँचाना है। 

आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर टिपण्णी के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। यकीं करें ! आपके द्वारा दिया गया विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा।  

प्रार्थी 

राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

                                  मित्र मंडली - 6


1. "पहले आप - पहले आप "सुधरो ! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र टिप्पणीकार)मो.न. 9414657511


"पहले आप - पहले आप "सुधरो ! - पीताम्बर दत्त शर्मा की पोस्ट विचारणीय है। जैसा की इन्होंने लिखा है कि सब कुछ संविधान के अनुसार हो रहा है तो ऐसे हालात में क्या किया जाए। भारत के सभी बुद्धिजीवी इस बात से आहत है कि भारत का संविधान कुछ कहता है और हमारी सरकारें और नेता लोग कुछ और कहते है।  मसलन जाति, लिंग, भाषा, धर्मऔर रंग के आधार पर भेद-भाव नहीं कर सकते परंतु वास्तविकता कुछ और है। मेरा तो मनना है की देश में पार्टी की ही प्रथा गलत है इससे परिवारवाद को बढ़ावा मिलता है या राजतंत्र की बू आती है। भारत को नेता नहीं अपितु समाजसेवक चाहिए जो हम किसी से भी उम्मीद नहीं कर सकते क्योंकि लाखों-करोड़ों खर्च कर कोई आपकी सेवा करने तो नहीं आयेगा। 



2. धीरे - धीरे ज़ख़्म सारे






3. भोपाल उत्सव मेले की रंगत में




4. योजनाओं का लाभ उठाया कैसे जाए ?इसपर भी जोर दो !- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न.- ९४१४६५७५११






5. मानवीय प्रतिरक्षा शक्ति : सतीश सक्सेना



6. हमे भी सोचना होगा, तुम्हें भी सोचना होगा ---------

राजेश जी की कविता "हमे भी सोचना होगा, तुम्हें भी सोचना होगा ---------" समाज को सन्देश देती कविता है कि अगर हमें शांति और सदभाव  के साथ जीना है तो आज के दौर में जीने के तरीके के बारे में सभी को चिंतन करने की आवश्यकता है। 




7. ग़ज़ल सम्राट स्व॰ जगजीत सिंह साहब की ७६ वीं जयंती






8. आदमी सोचते रहने से आदमी नहीं हुआ जाता है ‘उलूक’





9. हम ब्लॉक माइंड देसी लोग : सतीश सक्सेना





10. Ye kahaan se aa gayee bahar hai.


11. प्राण साहब की ९७ वीं जयंती




आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव आपेक्षित है। अगला अंक 20-02-2017  को प्रकाशित होगी। धन्यवाद ! अंत में ....




12. पुस्तक समीक्षा-1







Thursday, February 9, 2017

पुस्तक समीक्षा-1

पुस्तक समीक्षा- “ज़िन्दा है मन्टो”



केदारनाथ ‘शब्द मसीह’ एवं के.बी.एस. प्रकाशन, दिल्ली की पुस्तक “ज़िन्दा है मन्टो” एक लघु-कथा संग्रह है। मन्टो का नाम ज़ेहन में आते ही एक बेबाक अफसानानिगार की छवि उभरती है और इस पुस्तक में लिखी सभी लघु-कथाओं को पढ़ते हुए शब्द मसीहा जी को पाठक, मन्टो के सांचे में ढलते हुए महसूस करते हैं। इसको कहने में मुझे कोई अतिश्योक्ति नहीं लगती कि शब्द मसीहा जी ने मन्टो की विचार-धारा को आगे बढ़ाने का काम इस पुस्तक के माध्यम से किया है। 


इस पुस्तक के शीर्षक की सार्थकता इसकी कथाओं को पढ़कर सहज ही महसूस की जा सकती हैं। तथाकथित बोल्ड विषय पर लिखना कहाँ आसान होता है परन्तु शब्द मसीहा जी ने फूहड़ता से परहेज करते हुए इस विषय पर अपनी लेखनी से एक अलग ही छाप छोड़ी जो कहीं न कहीं पात्रों के मनोभाव को पाठक अपने अंतर्मन से महसूस करता है। बात जब बोल्ड विषयों पर लिखने की हो तो फूहड़ता का आरोप लगता रहा है और इससे मन्टो भी बच नहीं पाए थे परन्तु शब्द मसीहा जी ने अपने पात्रों की पीड़ा को संतुलित शब्दों का ज़ामा सभी कथाओं में पहनाया है।

इस लघु-कथा संग्रह में कुल 104 कथाएं हैं जो बिना रुके आपके चेहरे पर भिन्न-भिन्न भाव-भंगिमा उकेरने में सक्षम है और सभी कथाओं को पढ़ने के बाद भी कथाओं के पात्र बार-बार आपको फिर से इस पुस्तक को पढ़ने के लिए मजबूर करते हैं।

16 शब्दों की कथा अगर आपके ज़ेहन में सदा घूमती रहे तो ये कमाल करने का माद्दा शब्द मसीहां जी की लेखनी में है। इनकी कथा “सच” को पढ़ कर इस कमाल को महसूस कर सकते हैं।


केदारनाथ जी की दो काव्य संग्रह पूर्व में प्रकाशित हो चुके है और ‘ज़िन्दा है मन्टो’ इनका पहला कहानी संग्रह है जिसको पाठकों का भरपूर प्यार मिल रहा है।
नई पीढ़ी को अपनी लेखनी से मन्टो को परिचय कराने के लिए शब्द मसीहा जी को साधुवाद है।
पुस्तक खरीदने के लिए निचे दिए गए लिंक को क्लिक करें।

- © राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Monday, February 6, 2017

मित्र मंडली - 5



मित्रों ,
इस पोस्ट में शामिल रचनाओं के  चुनाव का दो आधार हैं :- 
1.  रचनाकार मित्रों का मेरे ब्लॉग का अनुसरणकर्ता/फॉलोवर होना अनिवार्य है।
2. पोस्ट का कंटेंट अश्लील या किसी भी व्यक्ति की भावनाओं पर चोट न पहुंचाती हो। 

"मित्र मंडली" की पाँचवीं कड़ी का पोस्ट प्रस्तुत है। इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग फॉलोवर/अनुसरणकर्ता के हिंदी पोस्ट के लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्ट का चयन साप्ताहिक आधार पर है।  इसमें  दिनांक 30.01.2017  से 05.02.2017  के हिंदी पोस्ट का संकलन है।

इसका उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों  तक पहुँचाना है। 

आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर टिपण्णी के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। यकीं करें ! आपके द्वारा दिया गया विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा।  

प्रार्थी 

राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

                                  मित्र मंडली - 5


1. वफ़ा





2. दो मिनट का मौन सायरन का तीस जनवरी के ग्यारह बजे





3. ओस





त्त्वपूर्ण हो जाती है। 








9. मां करती हूँ तुम्हें नमन !!







आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव आपेक्षित है। अगला अंक 13-02-2017  को प्रकाशित होगी। धन्यवाद ! अंत में ....

12. श्रम एवं परिश्रम